Wednesday, September 22, 2010

ये आंखे बोलती है ज्यादा !
उफ्फ्!
ये बोलती है कम,पर सुनती है ज्यादा!

जब लब ना बोले और धडकन ही सुनाई दे,
तो आंखे ही तुजे प्यार से सुनाने लगती है कुछ और ज्यादा !

जब खामोशियां गुंजने लगे तेरे मेरे हाथों के बीच,
तो आंखे ही सुनाती है,
तेरी मेरी पीछली कहानीयॉ,मीठी सी कुछ ज्यादा !

रवॉ सा हो जाये जब कुछ तेरे मेरे दरमीयॉ,
तो आंखे ही मनाती है और तू सुनता है उसे,
प्यार से कुछ ज्यादा!

तेरे मेरे बीच की दूरी का, गम का पानी,
ये सीती है ज्यादा या कुछ पीती है ये ज्यादा!

गुम-सुदा सी होती है कभी आवाझ तेरी मेरी,
तो आंखे ही सुनती है, सुनाती है तुम्हे कुछ कम ही!

पर क्या कहुं?
प्यार तेरी आंखोसे, मुझे है कुछ ज्यादा ही,
मे चाहुं उसकी आवाझ ना मै सुनु, ना तुं सुने ईतनी ज्यादा ही!!!!
**ब्रिंदा **

2 comments:

  1. ब्रिंदा मांकड को मै ्ब््धाई देता हु उन्हो ने गुजराती मे तो बहोत ही अच्छी अच्छी कविताएं दी है मगर आज उन्हो ने हिंदी और अंग्रेजी मे भी एक एक काव्य रखा है मै यह कहना चहुंगा की उन्हो ने अपी विद्वता दिाने के लीये ही ऐ्सा नहि किया है मगर हिंदी काव्य का मर्म जो हिंदी मे व्यक्त है वह गुजराती मे कतई व्यक्त नही हो शकता ऐसा ही उनकी ईंग्ली् कवीता के बारे मे भी है अपन अभिव्यक्ति के लिते जो भाषाएं चूनी है ईस से लगता है की वह अ्भिव्यक्ति के लीये सच्ची भाषा का भी चूनाव ि कर शकती है
    मेरि शुभ कामनाएं उनके साथ है र मै मानता हु कि अगर वे चाहे तो बहु भा्षी ्कवियित्री जरुर बन शकती है अिनंदन

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  2. तेरे मेरे बीच की दूरी का, गम का पानी,
    ये सीती है ज्यादा या कुछ पीती है ये ज्यादा!

    वाह

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