कैसा लगता है,
प्यार को अपने लिये रास्ते पे चलके आते देखना,
साथमे अपने जैसे फुलोका गुलदस्ता लेके आया, ऐसे देखना!
वो गुनगुनाते हंसते हुए आते है जैसे
उसकी सब रागिणीयों को तुम सुनके देखना!
खुशनसिब होते है जिसपे वो चलते है,
दिल की पगडंडीयों पे उनके चलने का अंदाझ देखना !
शायद, बारिश का मौसम हो जैसे,
उसका सिर्फ एक लम्हा चुराके देखना!
शायद, उसका दिल धडकता हो ऐसे मे,
उसका दिल चुराके देखना !
शायद, लेना या देना होता नही इस दुनिया मे जैसे,
कभी उसको सिर्फ एकबार पाके देखना !
**ब्रिंदा**
Tuesday, October 4, 2011
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