ख्वाबो का दौर होता तो कभी खत्म भी हो जाता,
पर तुम तो ख्वाब का दरिया हो ,
मेरे उपर बेपरवाह छाया हुआ.!
मुलाकात का सिलसिला कभी तो "शुक्रिया' से खत्म तो हो जाता,
पर तुम तो मेरे जीने का फलसफा हो,
मेरे दिल मे सांसे लेता हुआ!
रास्ता सैर का होता तो मंझिल पे खत्म तो हो जाता,
पर तुम तो कभी ना खत्म हो वो रास्ता हो,
मेरी मौजुदगी इस जहां मे दिखाता हुआ!
तेरा और मेरा मुसल्सल युं ऐसे इसी राह पे चलना और चलते रहेना!
**ब्रिंदा**
Monday, December 19, 2011
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